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girishnagda


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पत्तो पर प्रहार करने से कुछ नहीं होगा

Posted On: 12 Dec, 2016  
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जनता के मन की बात

Posted On: 28 Oct, 2016  
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जनता के मन की बात

Posted On: 28 Oct, 2016  
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जनता के मन की बात

Posted On: 28 Oct, 2016  
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सबक ले सरकार

Posted On: 13 Jan, 2016  
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खुला पत्र नरेन्द्र मोदीजी के नाम

Posted On: 8 Jan, 2016  
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हवा मे महल खड़े करने का प्रयास ना करे |

Posted On: 7 Jul, 2015  
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इटारसी मे जो 16जून को हुआ

Posted On: 7 Jul, 2015  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

भाई गिरीश जी आप निराश न हो टीम अन्ना का अंतिम लक्ष्य ही चुनाव लड़ना है या लड़ाना है क्योंकि आन्दोलन में माँगा तो बहुत कुछ जाता है परन्तु समझौता कुछ कम पर किया जाता है यहाँ तो मांगे कम से आरम्भ हो कर बढाती ही जाती है जिसका सीधा अर्थ है किसी भी बात को लटकाना न की उसका हल निकालना अत जनता भी जानती है की यह केवल प्रचार का साधन मात्र है टीम का लक्ष्य कुछ और है - एक सबसे बड़ी अजीब बात यह है की दो आन्दोलन ( बाबा और अन्ना ) का लक्ष्य तो एक है परन्तु दोनों अलग अलग शक्ति प्रदर्शन कर जनता को रिझाना चाहते है जिसका उल्टा मतलब निकल रहा है जो बाबा राम देव ने सिद्ध भी कर दिया यह कह कर की किसी भी आन्दोलन में कम से कम १ प्रतिशत जनता की भागीदारी निश्चित होनी चाहिए नहीं तो आन्दोलन कैसा ? कृपया मेरी पोस्ट भी देखे http://sohanpalsingh.jagranjunction.com/2012/07/27/%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%9c-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b9/ धन्यवाद.

के द्वारा:

गिरीश जी आपका लेख अतिउत्‍तम और सच्‍चाई को प्रदर्शित करते हुए लिखा गया है। यह सत्‍य है कि प्रदर्शन मे भीड जुटने से निर्णय नही बदलवाये जा सकते है लेकिन राजनीति के अलावा भी रास्‍ते है जो राजनीति से ज्‍यादा प्रभावी है। गिरीश जी मैने राजनीति के माध्‍यम से समाज मे कुछ बदलाव लाने की कोशिस की बदलाव तो नही आया मुझे अपने को बदलने पर मजबूर होना पड रहा है। राजनीति मे स्‍थापित लोग साम दाम दण्‍ड और भेद के माध्‍यम से अपना पद बचाये रखने मे सफल हो रहे है। यही लोग जो भ्रष्‍टाचार से ग्रस्‍त है जब वोट डालना होता है तो वे जाति धर्म और पैसे के लिये वोट देते है सुशासन के लिये नही। इसलिये अन्‍ना टीम का सामाजिक आन्‍दोलन ही आज के परिवेश मे छीक है। आवश्‍यकता है एक सकारात्‍मक शुरूआत की।

के द्वारा:

के द्वारा: girishnagda girishnagda

के द्वारा: girishnagda girishnagda

के द्वारा:

गिरीश जी आप ने वाकई बहुत ही सही विषय लिया है बहुत बहुत धन्यवाद यह बहुत बड़ी समस्या है डॉ. ने सेवा कप व्यवसाय बना दिया है ..एक मेरे मित्र के पिताजी को अटेक आया था उन्हें बुरहानपुर से इंदौर लाया गया था उन्हें डॉ. ने तुरंत बायपास करने के लिए कहा और कहा एक बलून लगाना होगा उसके ४०००० रु . लगेंगे और दो स्प्रिंग लगाने होंगे उस के ५०००० रु. अलग से लगेंगे चूँकि अंकल की उम्र ७२ वर्ष थी इस लिए मैंने मेरे मित्र से कहा यह बहुत रिस्की होगा और सभी विचार करने लगे अगले दिन डॉ. को लगा ये लोग अब शायद ओपरेशन नहीं कराएँगे उन्होंने तुरंत सब को बुलाया और कहा "मेरे ख्याल से बलून लगाने की जरूरत नहीं है और स्प्रिंग भी नहीं लगाया तो चल जायेगा लेकिन ओपरेशन जरुर कराइए नहीं तो ६ माह से अधिक उनका जीना असंभव है " फिर भी सब ने निर्णय लिया ओपरेशन नहीं करना है उम्र देखते हुए आज इस बात को लगभग २ साल हो गए है अंकल आज भी फिट है उस दिन का निर्णय आज सभी को सही लगता है लेकिन उस समय उनके इस निर्णय पर कितना दर्द देता होगा आप समझ सकते है उस मानसिक प्रताड़ना का क्या ?.............प्रजोत जोशी

के द्वारा: girishnagda girishnagda




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