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पत्तो पर प्रहार करने से कुछ नहीं होगा

Posted On 12 Dec, 2016 Others में

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मैं मोदी जी पर कुछ कहने जा रहा हूं परंतु इसके पहले मुझे कुछ और बातें स्पष्ट करना है सबसे पहली बात मेरी बात को पक्ष विपक्ष से अलग हटकर देखने का कष्ट करे प्रधानमंत्री के चुनाव की दौड़ में मोदी जी मेरे एकमात्र मनपसंद उम्मीदवार थे इनके समर्थन के लिए जो भी बन पड़ा मुझसे मैंने अपनी क्षमता के अनुरूप जी जान से किया मोदी जी की उम्मीदवारी के प्रति मैं इतना अधिक भावनात्मक रूप से उद्वेलित था की इसके लिए मैंने आडवाणी जी सुषमा स्वराज शिवराज सिंह चौहान आदि का भी जाने अनजाने यह समझ कर कि यह लोग मोदी जी की उम्मीदवारी में अवरोधक बन रहे हैं इसके लिए मैंने उनकी आलोचना की थी आप मेरी भावनाओं को और गहराई से देखना और समझना चाहे तो मेरी उन दिनों की पोस्टों को पढ़ सकते हैं देख सकते हैं आज कुछ माहोल ऐसा बन गया है कि मोदीजी के किसी भी निर्णय की आलोचना करो आपके ऊपर विरोधी का ठप्पा लग जाता है खैर मोदी जी प्रधानमंत्री बन गए उसके कुछ दिनों के बाद मुझे विपक्षी सदस्यों विपक्षी दलों के हमलों के प्रत्युत्तर में मोदी जी द्वारा यह कहां जाना कि उन्हें इतने साल दिए तो मुझे इतने माह तो दीजिए मुझे यह तर्क बिल्कुल पसंद नहीं आया उस दिन से आज तक मै उनके द्वारा दिए गए भाषण घोषणाओं और कार्यों में बहुत सारी बातों से अपने आप को सहमत नहीं कर पाया खासकर आरक्षण के समर्थन में बेवजह बयानबाजी दूसरी गोरक्षको को गुंडे करार देने की बेवजह की असत्य बयानबाजी भाजपा में गुंडे या गुंडागर्दी नहीं है ऐसा नहीं है ऐसा नहीं है भाजपा में गुंडे भी है गुंडागर्दी भी है और बहुत ज्यादा है कई जगह खुलकर राजनैतिक संरक्षण में है उन पर कभी कोई कार्यवाही भी नहीं होती परन्तु उनके खिलाफ आपने कभी कुछ नहीं कहा फिर जो नहीं कहना था वह क्यों कहाँ ,किसी वोट बैंक को ध्यान में रखकर ? समय-समय पर मैंने जो भी गलत लगा उस पर अपने विचार भी रखे लेकिन मैं एक चीज देख रहा हूं कि इस देश में व्यक्ति या तो अंधभक्त होता है या अंध विरोधी होता है व्यक्ति के कार्य व्यवहार निर्णय आदि को देखते हुए विवेक संगत वस्तुपरक समालोचना न की जाती है न उस व्यक्ति द्वारा उसे सुनना या देखना ही गवारा किया जाता है नोट बंदी के निर्णय की समालोचना करने से पहले मैं यह कहना चाहता हूं कि उसे स्वस्थ आलोचना के दृष्टिकोण से मेरे और आपके अहंकार से ऊपर उठकर देखने की महती आवश्यकता है और समूचे देश के द्वारा मोदी जी को यह संदेश पहुंचना ही चाहिए की वह अपनी किसी जिद अहंकार से किसी निर्णय को देश पर थोपने के पूर्व यह अवश्य देखें और समझे कि वह निर्णय राष्ट्रहित में है या नहीं है केवल इसके दो पहलू नहीं देखे बल्कि हर कदम निर्णय की क्या आवश्यकता,दशा और क्या दिशा है उसका क्या प्रभाव है और वास्तव में जिस कार्य को साधने के लिए देश को तैयार किया जा रहा है वह कार्य इससे सध भी पाएगा या नहीं कहीं इसके प्रभाव राष्ट्रहित के विरोध में तो नहीं जा रहे हैं
अब नोट बंदी के बारे में बात करते हैं नोट बंदी के निर्णय से बहुत से अनुषगिक अच्छे कार्य हुए हैं जैसे आतंकवादियों को धन की उपलब्धता मैं व्यवधान आने से उनके कार्यों में रुकावट आई है कश्मीर में कुछ समय के लिए सामान्य जनजीवन लौट आया है बाजार में नकली नोट जो बहुत अधिक मात्रा में खेल रहे थे वे समाप्त हो गए हैं पाकिस्तान के द्वारा नकली नोटों को छापकर भारत में अस्थिरता फैलाने का मंसूबा विफल हो गया है और कुछ काला धन भी बाजार से निकल गया है उत्तर प्रदेश का चुनाव मोदी जी ने लगभग जीत लिया है परंतु जिस मुख्य उद्देश्य के लिए नोट बंदी का यह बहुत बड़ा कदम उठाया गया कि देश का काला धन शून्य कर दिया जाएगा वह बिल्कुल भी नहीं हो पाया जनता पहले दिन से आज तक हैरान और परेशान है फिर भी आपके साथ है इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि वह समझ रही है कि आपने देश का काला धन समाप्त कर दिया है परंतु सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है कालाधन रखने वाले जो वास्तविक काले लोग हैं उनमें से कोई भी नोट बदलने के लिए लाइन में नहीं लगा और ना ही उनके पेट का पानी ही हिल पाया पूरी जिंदगी में जिस व्यक्ति ने दो या पांच लाख रुपए बनाए हैं जिनका उसके पास हिसाब देने का कोई उपाय नहीं है उसे तो फर्क पड़ा है परंतु जो व्यक्ति रोज के करोड़ो रुपए इकट्टे करता है कमाता है और अपने व्यक्तिगत आर्थिक विशेषज्ञ की सलाह और भारी भरकम रिश्वत चटपट चालाकी चतुराई बदमाशी से करोड़पति से अरबपति अरबपति से खरब पति बन जाता है उस पर तो कोई आंच ही नहीं आई है सभी जानते हैं की वास्तविक कालाधन रखने वाले, उपजाने वाले लोग या तो राजनीति से आते हैं या सरकारी विभागों से कुछ बड़े उद्योगपति और कुछ बड़े फिल्म अभिनेता भी इस श्रेणी में आते हैं क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इनमें से किसी भी मगरमच्छ का बाल भी बांका हुआ या हो सकता है आपने आम जनता को तो पूरी तरह से मथ ही डाला चोर भी बना डाला और ऊपर से आप के डराने वाले लगातार आने वाले भाषण भी जिनमे आप कह रहे है कि पचास हजार भी बिना हिसाब के मिले तो खैर नहीं जनता तो आज भी लाइन लगा रही है और शायद यह सिलसिला महीनों चल सकता है परंतु राष्ट्र हित में विषमता की जिस गहरी और विषाक्त खाई को कम करने का जो लक्ष्य था उसमें आपके इस कदम से कोई सहायता नहीं मिली उल्टा आम जनता अधिक मुसीबत में फंस गई है आज नहीं यह बात कुछ और दिनों के बाद जनता महसूस करेगी क्योंकि उसे अपने हर कार्य के लिए, हर कार्य को करवाने के लिए रिश्वत देने के लिए काला धन चाहिएगा परंतु वह उसके पास नहीं होगा और अपने हिसाब की कमाई से उसे चुकता करना होगा और हिसाब में नकदी कम दिखने पर अपराधी भी बनने के लिए विवश होना होगा क्योंकि रिश्वतखोर सरकार सरकारी अधिकारी बिना रिश्वत लिए कोई भी काम नहीं करेंगे क्योंकि उन्होंने तनख्वाह पर गुजारा करना कभी स्वीकार ही नहीं किया ना वे कर सकते हैं सातवे वेतन आयोग के अनुसार तो वेतन चाहिए ही साथ हर कार्य को करने का कमीशन (रिश्वत) भी चाहिए तो मोदी जी आप बताइए कि वास्तव में जिस बुराई पर आपको प्रहार करना था वह तो हो नहीं पाया क्योंकि जिस पर आपने शायद गहराई से योजनाबद्ध तरीके से विचार-विमर्श ही नहीं किया तो जनता को तो आपने बिना गुनाह के गंभीर सजा भुगतने के लिए विवश कर ही दिया है क्या अब आप वास्तविक काले लोगों की काली कमाई पर कोई ऐसा ही सख्त कदम उठाएंगे सुझाव बहुत हैं रास्ते भी बहुत हैं परंतु वास्तव में राष्ट्रहित में इक्का दुक्का छापामारी और काला धन बरामदगी से कुछ नहीं होगा यह सब पत्तो पर प्रहार करने जैसा है आप यह करना चाहते हैं जड़ो पर प्रहार किजीए निशाना लगाना है तो भारत के एक हजार प्रथम अमीरों पर निशाना लागाइए गरीब देश में इतना अमीर होना निश्चित अपराध ही है हो सकता है परिभाषाओ में उनका सारा धन सफेद ही हो क्योकि उनके पास देश के टापमोस्ट आर्थिक कानूनी सलाहकार और राजनैतिक और तन्त्र में मित्र है परन्तु वे आसमान से उतरे हुए अति अति बुद्धिमान नहीं है वे चालाक लोग है और चालाकी से देश को लूट लेने में माहिर है उनकी कोई सामाजिक और राष्ट्रीय विकास में जिम्मेदारीपूर्ण भूमिका भी नहीं है राष्ट्र की किसी भी आपदा से उन्हें कोई फर्क नहीं पढता है घेरना है तो उन्हें घेरिए जनता को तलकर प्रकारांतर रूप से आप उन्हें मदद ही कर रहे है इस बात को समझे और इस पर चितन कीजिए अहंकार और राजनीति से ऊपर उठकर तो ही आप देश का वास्तविक भला कर पाएगे |

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